Zahar Bujha Satya

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शनिवार, जून 13, 2020

वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वतंत्र तर्कशीलता | Scientific Temperament and Critical Inquiry




विकासवाद को समझने का सही तरीका बहुत से लोग नहीं जानते हैं। भ्रम से उपजा तरीका ही सब गड़बड़ी पैदा कर देता है। अवशेषी अंग, इस्तेमाल में न आने से गायब नहीं हुए बल्कि ऐसे मानव ही ज़िंदा बचे, जिनमें संयोग वश हुई आनुवंशिक गलती से उनकी अगली पीढ़ी में वे अंग समाप्त हो गए थे। पुराने अंगों के कारण हुई समस्याओं से पुराना मानव खत्म हो गया।

दिमाग में ये बात डाल ली जाए कि पहलवान/गणितज्ञ/वैज्ञानिक/कलाकार आदि का बेटा/बेटी जन्म से कभी पहलवान/गणितज्ञ/वैज्ञानिक/कलाकार नहीं होता। ये सभी बाद में अर्जित किये गए गुण हैं जो केवल सिखाने या उसके खुद सीख लेने पर ही आ सकते हैं। अतः अर्जित गुण अगली पीढ़ी में नहीं जाते।

यदि मानव कोई भोजन करके इस जीवन में स्वास्थ्य लाभ उठाता है तो उसकी अगली पीढ़ी में वह स्वास्थ्य प्रेषित नहीं होगा। अतः बाहरी प्रभाव कभी भी अगली पीढ़ी में नहीं जाते। कुछ वैज्ञानिकों द्वारा भोजन से मस्तिष्क के विकास की बात सिर्फ प्रोपोगंडा है। ~ Shubhanshu Dharmamukt 2020©

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