Zahar Bujha Satya

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If you have Steel Ears, You are Welcome!

सोमवार, जून 29, 2020

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक रूढ़ियां | Women Empowerment and Social Constraints



यदि आप इसलिये विवाह नहीं कर रहे कि महिलाएं नरक का द्वार हैं या वे बुरी या धोखेबाज होती हैं; ऐसी बात कहीं से सुन पढ़ रखी है, तो आप 1 नंबर के मूर्ख हैं।

दरअसल विवाह जिससे भी कर लोगे, वह आपसे बंध कर जल्द ही उकता जाता है और फिर वह अपनी जंजीर तोड़ने के लिये क्लेश करता है।

आज़ादी के लिये दुनिया मे लाखों लोग बली चढ़ गए लेकिन आज़ादी के बिना रोटी नहीं खाई। यही हमारे खून में है। हम सबको आज़ाद रहना है। आप पर कोई रोक टोक करे और आपको उसके टोकने में कोई भलाई न दिखे तो आप उससे कुढ़ने लगोगे।

यही नफ़रत क्लेश का कारण बनेगी। इसे दबा कर मन ही मन कुढ़ कर कैदी की तरह जी लिए तो विवाह सफल और अगर अंदर से इंकलाब ज़ोर मार गया तो मौके पर मौत या कत्ल के जुर्म में जेल। या कमज़ोर निकले, मुकाबला न कर सके; तो तलाक होना तो तय है।

फिर काहे अपनी "उसमें" छुरा कर रहे खुद ही? आपके विवाह का, चाहे आपकी मर्जी हो या न हो, एकमात्र ज़िम्मेदार, सिर्फ आप हो। और कोई नहीं। ये बात याद रखना। ~ Dharmamukt Shubhanshu 2020©

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